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कंधे में दर्द और जकड़न (फ्रोज़न शोल्डर) — कारण और इलाज

कंधे में दर्द और जकड़न (फ्रोज़न शोल्डर) — कारण और इलाज

कंधे में दर्द इतना बढ़ जाए कि कपड़े पहनना, बाल बनाना या ऊपर की अलमारी से सामान उठाना भी मुश्किल हो जाए, तो यह फ्रोज़न शोल्डर का संकेत हो सकता है। इसे आम भाषा में “कंधे का जाम होना” भी कहा जाता है। ज़्यादातर लोग शुरुआत में इसे मांसपेशियों का खिंचाव समझकर तेल मालिश या दर्द की गोली से काम चलाते रहते हैं। इस वजह से जकड़न धीरे-धीरे बढ़ती जाती है और कंधा हिलाना लगभग बंद हो जाता है। इस ब्लॉग में जानेंगे कि फ्रोज़न शोल्डर क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या हैं, और इसका इलाज कैसे होता है।

फ्रोज़न शोल्डर क्या है

कंधे का जोड़ एक कैप्सूल जैसी मज़बूत परत से घिरा होता है। फ्रोज़न शोल्डर (मेडिकल भाषा में एडहेसिव कैप्सुलाइटिस) में यह परत मोटी और सख्त हो जाती है और जोड़ के आसपास चिपकाव बनने लगता है। नतीजा यह कि कंधा न अपने आप पूरी तरह घूम पाता है, न कोई दूसरा व्यक्ति उसे पूरा घुमा पाता है। यह समस्या आमतौर पर 40 से 60 साल की उम्र में होती है, और महिलाओं में ज़्यादा देखी जाती है।

फ्रोज़न शोल्डर के कारण

कई बार इसका कोई साफ कारण नहीं मिलता, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा काफी बढ़ जाता है:

  • डायबिटीज़ — डायबिटीज़ के मरीज़ों में फ्रोज़न शोल्डर का खतरा सामान्य लोगों से कई गुना ज़्यादा होता है
  • थायरॉइड की समस्या
  • कंधे की पुरानी चोट या फ्रैक्चर, जिसके बाद कंधे को लंबे समय तक हिलाया न गया हो
  • कंधे या छाती की सर्जरी के बाद कंधे का इस्तेमाल कम हो जाना
  • हाथ पर लंबे समय तक प्लास्टर या स्लिंग बंधे रहना
  • स्ट्रोक या हृदय रोग के बाद हाथ की गतिविधि घट जाना
  • 40 से 60 साल की उम्र और महिला होना

फ्रोज़न शोल्डर के तीन चरण

यह समस्या एक साथ नहीं आती, बल्कि तीन चरणों में आगे बढ़ती है:

1. फ्रीज़िंग स्टेज (दर्द का दौर)
कंधे में दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है, खासकर रात में और करवट लेते समय। कंधे की गति कम होने लगती है। यह चरण आमतौर पर कुछ महीनों तक चलता है।

2. फ्रोज़न स्टेज (जकड़न का दौर)
दर्द कुछ कम हो सकता है, लेकिन कंधा बहुत ज़्यादा जकड़ जाता है। हाथ ऊपर उठाना, पीछे ले जाना या बगल में फैलाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। रोज़मर्रा के काम सबसे ज़्यादा इसी चरण में प्रभावित होते हैं।

3. थॉइंग स्टेज (सुधार का दौर)
कंधे की गति धीरे-धीरे लौटने लगती है। यह चरण सबसे लंबा चल सकता है, कई बार महीनों से लेकर एक-दो साल तक।

फ्रोज़न शोल्डर के लक्षण

  • कंधे में लगातार दर्द, जो रात में बढ़ जाता है
  • करवट लेकर सोने में तकलीफ
  • हाथ ऊपर उठाने में दिक्कत, जैसे बाल बांधना या ऊपर से सामान उतारना
  • हाथ पीछे ले जाने में परेशानी, जैसे पीठ पर कपड़े की ज़िप बंद करना या ब्लाउज़-शर्ट के बटन लगाना
  • कंधे का धीरे-धीरे जकड़ते जाना
  • दूसरा व्यक्ति हाथ घुमाने की कोशिश करे, तब भी कंधा पूरा न घूमना

फ्रोज़न शोल्डर और रोटेटर कफ इंजरी में फर्क

दोनों में कंधे का दर्द होता है, इसलिए लोग अक्सर इन्हें एक ही समझ लेते हैं। फर्क यह है कि फ्रोज़न शोल्डर में मरीज़ खुद हाथ उठाए या कोई और उठाए, दोनों ही हालत में कंधा पूरा नहीं घूमता। रोटेटर कफ इंजरी में मरीज़ खुद हाथ नहीं उठा पाता, लेकिन कोई दूसरा व्यक्ति उठाए तो कंधा काफी हद तक घूम जाता है। सही पहचान के लिए ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी है, क्योंकि दोनों का इलाज अलग होता है।

जांच में क्या किया जाता है

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. नवनीत निश्चल पहले कंधे की गति की क्लिनिकल जांच करते हैं, और ज़रूरत के अनुसार ये टेस्ट कराते हैं:

  • एक्स-रे — कंधे के जोड़ में गठिया या हड्डी की किसी अन्य समस्या को पहचानने के लिए
  • अल्ट्रासाउंड या एमआरआई — टेंडन, लिगामेंट और कैप्सूल की स्थिति देखने के लिए, खासकर जब रोटेटर कफ इंजरी की आशंका हो
  • ब्लड शुगर और थायरॉइड की जांच — क्योंकि डायबिटीज़ और थायरॉइड इसके बड़े कारण हैं

फ्रोज़न शोल्डर का इलाज

ज़्यादातर मामलों में फ्रोज़न शोल्डर का इलाज बिना सर्जरी के हो जाता है। चरण और गंभीरता के हिसाब से इलाज तय होता है:

  • दवाइयां — दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक दवाइयां
  • फिजियोथेरेपी — यह इलाज की सबसे अहम कड़ी है। नियमित स्ट्रेचिंग और गति बढ़ाने वाली एक्सरसाइज़ से कंधे की जकड़न धीरे-धीरे खुलती है
  • गर्म सिकाई — मांसपेशियों को ढीला करने और एक्सरसाइज़ से पहले आराम देने के लिए
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन — जब दर्द बहुत ज़्यादा हो, तब जोड़ के अंदर इंजेक्शन से सूजन और दर्द में राहत मिलती है
  • हाइड्रोडाइलेटेशन — जोड़ के कैप्सूल में तरल भरकर उसे ढीला करने की प्रक्रिया
  • सर्जरी — जब 6 से 12 महीने के इलाज के बाद भी कंधा न खुले, तब आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन विधि) से कसे हुए कैप्सूल को ढीला किया जाता है

डॉ. नवनीत निश्चल हर मरीज़ की स्थिति देखकर इलाज तय करते हैं, और सर्जरी की सलाह तभी दी जाती है जब बाकी सभी उपाय असर न करें।

घर पर किन बातों का ध्यान रखें

  • दर्द के डर से कंधे को बिल्कुल न रोकें। हल्की गति जारी रखना ज़रूरी है, वरना जकड़न और बढ़ती है
  • फिजियोथेरेपिस्ट की बताई एक्सरसाइज़ नियमित करें और ज़बरदस्ती झटके से कंधा खींचने से बचें
  • एक्सरसाइज़ से पहले गर्म पानी की सिकाई करें
  • डायबिटीज़ है तो ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें, क्योंकि इससे इलाज के नतीजे बेहतर होते हैं
  • रात को दर्द वाले कंधे के नीचे तकिया लगाकर सोएं, ताकि दबाव कम रहे

इंश्योरेंस, TPA और आयुष्मान भारत सपोर्ट

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के खर्च की चिंता कम करने के लिए अलग इंश्योरेंस डेस्क उपलब्ध है। ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैशलेस इलाज, TPA से सीधा तालमेल ताकि क्लेम अटके नहीं, और आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत पात्र मरीज़ों का इलाज भी उपलब्ध है।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर कंधे का दर्द 2 से 3 हफ्ते से ज़्यादा समय से बना हुआ है, रात में नींद टूट रही है, हाथ ऊपर उठाने या पीछे ले जाने में लगातार दिक्कत हो रही है, या डायबिटीज़ के साथ कंधे में जकड़न महसूस हो रही है, तो देर न करें और डॉ. नवनीत निश्चल से सलाह लें। जितनी जल्दी जांच और इलाज शुरू होता है, कंधा उतनी जल्दी और बेहतर तरीके से ठीक होता है।

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल क्यों चुनें

  • डॉ. नवनीत निश्चल, ऑर्थोपेडिक सर्जन (MBBS, DNB Ortho, MCh) की देखरेख में इलाज
  • एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसी जांच एक ही जगह उपलब्ध
  • फिजियोथेरेपी से लेकर आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी तक हर स्टेज का इलाज
  • कैशलेस इंश्योरेंस, TPA कोऑर्डिनेशन और आयुष्मान भारत सपोर्ट
  • गया और मगध क्षेत्र में ही विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक देखभाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह हर मरीज़ में अलग होता है। सही इलाज और नियमित फिजियोथेरेपी के साथ ज़्यादातर मरीज़ों को कुछ महीनों में काफी राहत मिल जाती है, हालांकि पूरी गति लौटने में कभी-कभी एक से दो साल तक लग सकते हैं।

 

कुछ मामलों में समय के साथ सुधार होता है, लेकिन इलाज के बिना इसमें बहुत लंबा समय लग सकता है और कंधे की गति पूरी तरह नहीं लौटती। इसलिए जांच और फिजियोथेरेपी शुरू कराना बेहतर है।

 

हां, डायबिटीज़ के मरीज़ों में यह समस्या ज़्यादा होती है और कई बार दोनों कंधों में भी हो सकती है। शुगर नियंत्रण में रखना इलाज का ज़रूरी हिस्सा है।

 

नहीं, ज़्यादातर मरीज़ दवाई, फिजियोथेरेपी और इंजेक्शन से ठीक हो जाते हैं। सर्जरी सिर्फ उन मामलों में सुझाई जाती है जहां लंबे इलाज के बाद भी कंधा न खुले।

 

हां, अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इसके लिए पहले से सूचीबद्ध है।

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