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घुटने का रिप्लेसमेंट कब करवाना चाहिए? उम्र, लक्षण और कारण

घुटने का ऑपरेशन सिर्फ बहुत ज़्यादा उम्र के लोगों की सर्जरी नहीं है, जैसा आमतौर पर माना जाता है। घुटना प्रत्यारोपण के फैसले का उम्र से उतना संबंध नहीं जितना इस बात से है कि घुटने का जोड़ अंदर से कितना घिस चुका है। उदाहरण के तौर पर कई बार 60 साल का व्यक्ति भी बिना ऑपरेशन के सामान्य रूप से चल पाता है, जबकि 45 साल की उम्र में ही किसी को घुटने की गंभीर समस्या हो सकती है। इस लेख में  हम जानेंगे कि  KNEE REPLACEMENT किस स्थिति में ज़रूरी होता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, और यह समस्या किन कारणों से होती है।

घुटने का रिप्लेसमेंट (घुटना बदलवाने का ऑपरेशन) क्या है

घुटने के जोड़ में जो हिस्सा घिस चुका होता है, सर्जरी में उसे हटाकर वहां मेटल और मेडिकल-ग्रेड प्लास्टिक से बना एक कृत्रिम जोड़ लगाया जाता है। इसे ही आमतौर पर घुटने का ऑपरेशन या KNEE REPLACEMENT SURGERY कहा जाता है। यह इलाज का पहला विकल्प नहीं होता — दवाई, इंजेक्शन और फिजियोथेरेपी जैसे उपाय आज़माने के बाद भी जब घुटने के दर्द में कोई राहत नहीं होती, तभी सर्जरी की सलाह दी जाती है।

घुटना बदलवाने की सही उम्र क्या है

घुटने के प्रत्यारोपण के लिए कोई निश्चित उम्र तय नहीं है। असली आधार है जोड़ की डैमेज कितनी गंभीर है, न कि सिर्फ उम्र।

  • 50 से 70 साल की उम्र में सबसे ज़्यादा मामले सामने आते हैं, क्योंकि इसी उम्र में गठिया (OSTEOARTHRITIS) का असर घुटनों पर सबसे ज़्यादा होता है।
  • 50 साल से कम उम्र में भी घुटने का ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है, खासकर पुरानी चोट, रूमेटॉइड आर्थराइटिस, या अनुवांशिक जोड़ों की समस्या होने पर।
  • 70 साल से अधिक उम्र में भी, अगर मरीज़ शारीरिक रूप से सक्षम है, तो सिर्फ उम्र की वजह से सर्जरी को टाला नहीं जाता।
  • सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है — एक्स-रे में हड्डी की स्थिति और रोज़मर्रा के कामों में आ रही दिक्कत।

हर मरीज़ की व्यक्तिगत जांच के बाद ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि घुटने का ऑपरेशन ज़रूरी है या नहीं।

घुटने के दर्द के शुरुआती लक्षण (ghutne ka dard ke lakshan)

  • चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते-उतरते समय घुटने में दर्द होना
  • सुबह उठते ही घुटनों में अकड़न महसूस होना, जो थोड़ा चलने पर कम हो जाए
  • ज़मीन पर बैठने के बाद उठने में तकलीफ होना
  • घुटने में बार-बार सूजन आना
  • घुटना मोड़ते समय कट-कट या रगड़ने जैसी आवाजें आना
  • ज़्यादा देर चलने या खड़े रहने पर दर्द बढ़ जाना
  • रात में दर्द के कारण नींद पूरी न होना

शुरुआत में ये लक्षण मामूली लगते हैं और आराम या दवाई से कुछ समय के लिए ठीक भी हो जाते हैं। इन्हें नज़रअंदाज़ करने पर जोड़ो के नुकसान धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और आगे चलकर घुटना बदलवाने की नौबत आ सकती है।

घुटने की डैमेज और जोड़ों के दर्द के कारण

  • गठिया / ऑस्टियोआर्थराइटिस — उम्र के साथ कार्टिलेज का घिसना, सबसे आम कारण
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस — जब इम्यून सिस्टम जोड़ को नुकसान पहुंचाने लगे
  • पुरानी लिगामेंट या मेनिस्कस इंजरी, जिसका समय पर इलाज नहीं हुआ
  • ज़्यादा वज़न (मोटापा), जो घुटने पर लगातार अतिरिक्त दबाव डालता है
  • पुरानी फ्रैक्चर या दुर्घटना के बाद बनी आर्थराइटिस
  • पारिवारिक इतिहास — परिवार में जोड़ों की समस्या रही हो

जांच (डायग्नोसिस) के लिए किए जाने वाले टेस्ट

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गया में क्लिनिकल जांच के साथ निम्न टेस्ट किए जाते हैं:

  • वेट-बेयरिंग एक्स-रे — जोड़ की स्थिति और डिफॉर्मिटी जांचने के लिए
  • ब्लड टेस्ट — सर्जरी के लिए फिटनेस जांचने के लिए
  • ईसीजी, और 50 से ऊपर के मरीज़ों के लिए ज़रूरत पड़ने पर कार्डियोलॉजिस्ट की राय
  • एमआरआई — कुछ मामलों में लिगामेंट या कार्टिलेज की विस्तृत जानकारी के लिए

जोड़ों के दर्द का इलाज: ऑपरेशन से पहले और बाद के विकल्प

शुरुआती स्टेज में (बिना ऑपरेशन इलाज):

  • वज़न नियंत्रण और लाइफस्टाइल में बदलाव
  • फिजियोथेरेपी और घुटने मज़बूत करने वाली एक्सरसाइज़
  • दवाई या इंजेक्शन से दर्द प्रबंधन
  • नी ब्रेस या वॉकिंग सपोर्ट का इस्तेमाल

जब ये उपाय काम करना बंद कर दें, तब घुटना बदलवाने के ये विकल्प अपनाए जाते हैं:

  • पार्शियल नी रिप्लेसमेंट — जब डैमेज जोड़ के एक हिस्से तक सीमित हो
  • टोटल नी रिप्लेसमेंट (पूरे घुटने का ऑपरेशन) — जब पूरा जोड़ खराब हो चुका हो
  • बाईलेटरल नी रिप्लेसमेंट — जब दोनों घुटने बदलवाने की ज़रूरत हो
  • रिविज़न सर्जरी — जब पहले हो चुकी रिप्लेसमेंट को दोबारा ठीक करना पड़े

इंश्योरेंस, TPA और आयुष्मान भारत सपोर्ट

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गया में घुटने के ऑपरेशन के खर्च से जुड़ी सभी ज़रूरतों के लिए अलग इंश्योरेंस डेस्क उपलब्ध है:

  • ज़्यादातर प्रमुख हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैशलेस इलाज
  • TPA के साथ सीधा तालमेल, ताकि क्लेम अप्रूवल में देरी न हो
  • प्री-ऑथराइज़ेशन के कागज़ी काम में पूरी सहायता
  • आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत पात्र मरीज़ों का इलाज
  • रीइम्बर्समेंट क्लेम में सहायता
  • ज़रूरी दस्तावेज़ों की जानकारी भर्ती से पहले ही उपलब्ध

घुटना बदलने के बाद रिकवरी टाइमलाइन

  • हॉस्पिटल स्टे: 4-5 दिन
  • सहारे के साथ चलना: 24-48 घंटों में शुरू
  • बिना सहारे चलना: 3-4 हफ्ते
  • सामान्य दिनचर्या: 6-8 हफ्ते
  • पूरी रिकवरी: 3-6 महीने

हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थो डॉक्टर) से कब मिलें

  • 3 महीने से ज़्यादा समय से घुटने का दर्द दवाई लेने के बावजूद बना हुआ हो
  • बिना सहारे चलना मुश्किल हो गया हो
  • घुटने की सूजन कम न हो रही हो
  • रोज़मर्रा की ज़िंदगी जोड़ों के दर्द से प्रभावित हो रही हो

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गया क्यों चुनें

  • डॉ. नवनीत निश्चल, हड्डी रोग विशेषज्ञ (MBBS, DNB Ortho, MCh) द्वारा विशेषज्ञ इलाज
  • एडवांस इम्प्लांट तकनीक से लैस मॉडर्न ऑपरेशन थियेटर
  • सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन सपोर्ट
  • कैशलेस इंश्योरेंस, TPA को-ऑर्डिनेशन और आयुष्मान भारत सपोर्ट
  • गया, बिहार में ही उपलब्ध विशेषज्ञ हड्डी रोग इलाज — पटना या दिल्ली जाने की ज़रूरत नहीं

 

कोई तय उम्र नहीं है। ज़्यादातर मरीज़ 50-70 की उम्र में यह करवाते हैं, लेकिन डैमेज गंभीर हो तो इससे कम या ज़्यादा उम्र में भी ज़रूरत पड़ सकती है।

नहीं। पुरानी चोट, रूमेटॉइड आर्थराइटिस या पारिवारिक जोड़ों की समस्या हो, तो युवाओं को भी घुटना बदलवाना पड़ सकता है।

हां, अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इसके लिए पहले से सूचीबद्ध है।

सर्जरी एनेस्थीसिया के तहत होती है, उस दौरान दर्द महसूस नहीं होता। बाद में हल्की तकलीफ दवाओं से कुछ दिनों में संभल जाती है।

Author

Dr. Navneet Nishchal

Orthosurgeon
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