Arsh Sperspeciality Hospital

स्पाइन और कमर दर्द — फिजियोथेरेपी कब काम नहीं करती

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स्पाइन और कमर दर्द — फिजियोथेरेपी कब काम नहीं करती

डॉ. नवनीत निश्चल, ऑर्थोपेडिक सर्जन, अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, गया

कमर दर्द होने पर ज़्यादातर लोग सबसे पहले फिजियोथेरेपी की तरफ जाते हैं, और सही भी है — बहुत से मामलों में यह अकेले ही काफी राहत दे देती है। दिक्कत तब होती है जब हफ्तों-महीनों फिजियोथेरेपी चलती रहती है, पर दर्द जस का तस बना रहता है, और मरीज़ को समझ नहीं आता कि आगे क्या करें। इस लेख में जानेंगे कि कमर और स्पाइन के दर्द के पीछे क्या कारण होते हैं, फिजियोथेरेपी कब तक कारगर रहती है, और कब यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि अब किसी विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

कमर दर्द के आम कारण

  • मांसपेशियों में खिंचाव या गलत पोस्चर की वजह से हुआ दर्द
  • लंबे समय तक एक ही पोज़िशन में बैठे रहना, खासकर डेस्क जॉब में
  • स्लिप डिस्क — जब स्पाइन की डिस्क अपनी जगह से खिसक जाए
  • स्पाइनल स्टेनोसिस — स्पाइनल कैनाल का सिकुड़ना, जिससे नर्व पर दबाव पड़े
  • उम्र के साथ स्पाइन की हड्डियों और डिस्क का घिसना
  • पुरानी चोट या दुर्घटना का असर
  • भारी वज़न उठाने की गलत आदत

फिजियोथेरेपी कब असरदार होती है

शुरुआती स्टेज के कमर दर्द में फिजियोथेरेपी काफी कारगर साबित होती है। मांसपेशियों का खिंचाव, गलत पोस्चर से हुआ दर्द, या हल्की स्टिफनेस — इन मामलों में एक्सरसाइज़, स्ट्रेचिंग और सही तकनीक से दर्द में अच्छी राहत मिलती है। ज़्यादातर मरीज़ 4-6 हफ्तों की नियमित फिजियोथेरेपी में सुधार महसूस करने लगते हैं।

फिजियोथेरेपी कब काम करना बंद कर देती है

कुछ स्थितियों में सिर्फ फिजियोथेरेपी से राहत नहीं मिलती, और आगे की जांच ज़रूरी हो जाती है:

  • 6-8 हफ्तों की नियमित फिजियोथेरेपी के बाद भी दर्द में कोई सुधार न हो
  • दर्द कमर से पैर तक फैलने लगे (सायटिका जैसा दर्द)
  • पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या कमज़ोरी महसूस हो
  • चलने, खड़े होने या बैठने में दर्द लगातार बढ़ता जाए
  • रात में दर्द के कारण नींद टूटती रहे
  • पेशाब या मल पर नियंत्रण में दिक्कत महसूस हो (यह एक गंभीर संकेत है, तुरंत डॉक्टर से मिलें)

इन लक्षणों का मतलब है कि समस्या सिर्फ मांसपेशियों तक सीमित नहीं, बल्कि डिस्क या नर्व से जुड़ी हो सकती है — जिसके लिए विस्तृत जांच ज़रूरी है।

जांच में क्या किया जाता है

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. नवनीत निश्चल क्लिनिकल जांच के साथ ज़रूरत के अनुसार ये टेस्ट कराते हैं:

  • एक्स-रे — स्पाइन की बनावट और अलाइनमेंट देखने के लिए
  • एमआरआई — डिस्क, नर्व और सॉफ्ट टिश्यू की विस्तृत जानकारी के लिए
  • ब्लड टेस्ट — अगर इंफेक्शन या अन्य कारण की आशंका हो

इलाज के विकल्प: फिजियोथेरेपी के आगे क्या

फिजियोथेरेपी असर न करे तो तुरंत ऑपरेशन ज़रूरी नहीं होता। स्थिति के अनुसार यह विकल्प अपनाए जाते हैं:

  • दर्द प्रबंधन के लिए दवाई या इंजेक्शन थेरेपी
  • एपिड्यूरल इंजेक्शन — नर्व के आसपास सूजन कम करने के लिए
  • जीवनशैली और पोस्चर में बदलाव के साथ एडवांस फिजियोथेरेपी
  • सर्जरी — जब डिस्क या नर्व की समस्या गंभीर हो और अन्य उपाय असर न करें, जैसे डिस्क रिमूवल या स्पाइनल डीकंप्रेशन सर्जरी

डॉ. नवनीत निश्चल हर मरीज़ की स्थिति अलग से जांचते हैं और सर्जरी को हमेशा आखिरी विकल्प के तौर पर ही सुझाते हैं, जब बाकी सभी उपाय असर न करें।

इंश्योरेंस, TPA और आयुष्मान भारत सपोर्ट

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के खर्च से जुड़ी चिंता कम करने के लिए अलग इंश्योरेंस डेस्क उपलब्ध है — ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैशलेस इलाज, TPA से सीधा तालमेल ताकि क्लेम अटके नहीं, और आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत पात्र मरीज़ों का इलाज भी उपलब्ध है।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर फिजियोथेरेपी के बावजूद दर्द बना हुआ है, पैरों में कमज़ोरी या सुन्नपन महसूस हो रहा है, या रोज़मर्रा की ज़िंदगी दर्द से प्रभावित हो रही है — तो अब देर न करें और डॉ. नवनीत निश्चल से मिलें।

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल क्यों चुनें

  • डॉ. नवनीत निश्चल, ऑर्थोपेडिक सर्जन (MBBS, DNB Ortho, MCh) द्वारा विशेषज्ञ इलाज
  • एडवांस डायग्नोस्टिक सुविधाएं — एक्स-रे, एमआरआई एक ही जगह उपलब्ध
  • फिजियोथेरेपी से लेकर सर्जरी तक, हर स्टेज पर इलाज
  • कैशलेस इंश्योरेंस, TPA कोऑर्डिनेशन और आयुष्मान भारत सपोर्ट
  • गया और मगध क्षेत्र में ही उपलब्ध विशेषज्ञ स्पाइन केयर

आमतौर पर 6-8 हफ्तों की नियमित फिजियोथेरेपी के बाद सुधार दिखना चाहिए। अगर इसके बाद भी राहत न मिले, तो आगे की जांच ज़रूरी है।

जब दर्द पैरों तक फैलने लगे, पैरों में कमज़ोरी या सुन्नपन हो, और फिजियोथेरेपी व दवाइयों से भी राहत न मिले, तब सर्जरी पर विचार किया जाता है।

नहीं, ज़्यादातर स्लिप डिस्क के मामले फिजियोथेरेपी और दवाइयों से ठीक हो जाते हैं। सर्जरी सिर्फ गंभीर या लगातार बने रहने वाले मामलों में सुझाई जाती है।

हां, अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इसके लिए पहले से सूचीबद्ध है।

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