Arsh Sperspeciality Hospital

हड्डियों की कमज़ोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) — किन्हें ज़्यादा खतरा है और कैसे बचें

osteoporosis-haddiyon-ki-kamzori-arsh-hospital-gaya

हड्डियां हमारे शरीर का ढांचा हैं, लेकिन उम्र के साथ ये चुपचाप कमज़ोर होने लगती हैं और इसका पता तब चलता है जब मामूली सा झटका लगने पर भी फ्रैक्चर हो जाए। ऑस्टियोपोरोसिस को इसीलिए “साइलेंट डिज़ीज़” कहा जाता है। इसमें न कोई खास दर्द होता है, न कोई साफ लक्षण दिखते हैं। इस ब्लॉग में जानेंगे कि ऑस्टियोपोरोसिस क्या है, किन लोगों को इसका खतरा ज़्यादा होता है, इसकी जांच कैसे होती है, और हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए क्या करना चाहिए।

ऑस्टियोपोरोसिस क्या है

हमारी हड्डियां जीवित ऊतक हैं, जो लगातार टूटती और नई बनती रहती हैं। जवानी में नई हड्डी बनने की रफ्तार ज़्यादा होती है, लेकिन 30-35 की उम्र के बाद यह धीमी पड़ने लगती है। जब हड्डी टूटने की रफ्तार, बनने की रफ्तार से ज़्यादा हो जाए, तो हड्डियों का घनत्व घटने लगता है। वे अंदर से खोखली और छिद्रदार (स्पंज जैसी) हो जाती हैं। इसी स्थिति को ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। ऐसी हड्डियां इतनी नाज़ुक हो जाती हैं कि हल्की चोट, झुकने या खांसने तक से टूट सकती हैं।

किन लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा ज़्यादा होता है

  • उम्रदराज़ लोग — खासकर 50 साल के बाद खतरा तेज़ी से बढ़ता है
  • मेनोपॉज़ के बाद की महिलाएं — एस्ट्रोजन हार्मोन घटने से हड्डियां तेज़ी से कमज़ोर होती हैं, इसलिए पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह समस्या ज़्यादा होती है
  • पारिवारिक इतिहास वाले लोग — माता-पिता को ऑस्टियोपोरोसिस या कूल्हे का फ्रैक्चर रहा हो (आनुवंशिक कारण)
  • कैल्शियम और विटामिन D की कमी वाले लोग — खान-पान में इनकी कमी या धूप से दूरी
  • धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोग
  • कम वज़न या बहुत दुबले-पतले लोग
  • शारीरिक गतिविधि न करने वाले लोग — लंबे समय तक बैठे रहना या बिस्तर पर रहना
  • लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाइयां लेने वाले लोग
  • थायरॉइड, किडनी या पाचन से जुड़ी पुरानी बीमारियों वाले लोग

ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

शुरुआती स्टेज में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते, इसीलिए इसे पहचानना मुश्किल होता है। बीमारी बढ़ने पर ये संकेत दिख सकते हैं:

  • पीठ या कमर में बार-बार दर्द
  • कद धीरे-धीरे घटना
  • पीठ का आगे की ओर झुकना (कूबड़ निकलना)
  • मामूली चोट या गिरने पर हड्डी टूट जाना, खासकर कूल्हे, कलाई और रीढ़ की हड्डी में
  • नाखून और मांसपेशियों में कमज़ोरी, जल्दी थक जाना
  • हड्डियों और जोड़ों में सामान्य से ज़्यादा दर्द

जांच कैसे होती है

ऑस्टियोपोरोसिस का पता लगाने के लिए सबसे भरोसेमंद जांच बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA स्कैन) है। अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. नवनीत निश्चल क्लिनिकल जांच के साथ ज़रूरत के अनुसार ये टेस्ट कराते हैं:

  • DEXA स्कैन — हड्डियों के घनत्व की जांच, जिससे फ्रैक्चर के खतरे का अंदाज़ा लगता है
  • ब्लड टेस्ट — कैल्शियम, विटामिन D, थायरॉइड और अन्य हार्मोन की जांच
  • एक्स-रे — रीढ़ या अन्य हड्डियों में फ्रैक्चर या बदलाव देखने के लिए

इन लोगों को जांच जल्दी करानी चाहिए: 50 से ऊपर की उम्र के लोग, मेनोपॉज़ के बाद की महिलाएं, और जिन्हें ऊपर बताए गए जोखिम कारक हों।

ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज

इलाज का मकसद हड्डियों को और कमज़ोर होने से रोकना और फ्रैक्चर का खतरा घटाना है:

  • कैल्शियम और विटामिन D सप्लीमेंट — कमी होने पर डॉक्टर की सलाह से
  • हड्डियों को मज़बूत करने वाली दवाइयां — जो हड्डी के टूटने की रफ्तार घटाती हैं या नई हड्डी बनने में मदद करती हैं
  • हार्मोन से जुड़े इलाज — कुछ मामलों में, डॉक्टर के मूल्यांकन के बाद
  • व्यायाम और फिजियोथेरेपी — संतुलन और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए, ताकि गिरने का खतरा घटे
  • फ्रैक्चर होने पर — स्थिति के अनुसार प्लास्टर, फिक्सेशन सर्जरी या ज़रूरत पड़ने पर जॉइंट रिप्लेसमेंट

कोई भी दवाई या सप्लीमेंट अपने आप शुरू न करें। मात्रा और अवधि जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।

हड्डियों को मज़बूत रखने के लिए कैसे बचें

  • कैल्शियम से भरपूर खाना खाएं — दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां (जैसे पालक), रागी, तिल, बादाम और टोफू
  • विटामिन D के लिए रोज़ धूप लें — सुबह की हल्की धूप में 15-20 मिनट बिताएं
  • रोज़ व्यायाम करें — टहलना, हल्की दौड़, सीढ़ियां चढ़ना और वज़न उठाने वाली एक्सरसाइज़ हड्डियों को मज़बूत बनाती हैं
  • योग और स्ट्रेचिंग करें — शरीर का संतुलन और लचीलापन बेहतर होता है, जिससे गिरने की आशंका कम होती है
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें
  • वज़न संतुलित रखें, बहुत कम वज़न से बचें
  • घर में गिरने के खतरे कम करें — फिसलन वाली जगहों पर मैट लगाएं, रोशनी का इंतज़ाम रखें, बाथरूम में सहारे के लिए हैंडल लगवाएं
  • 50 के बाद, या मेनोपॉज़ के बाद नियमित जांच कराएं

इंश्योरेंस, TPA और आयुष्मान भारत सपोर्ट

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के खर्च की चिंता कम करने के लिए अलग इंश्योरेंस डेस्क उपलब्ध है। ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैशलेस इलाज, TPA से सीधा तालमेल ताकि क्लेम अटके नहीं, और आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत पात्र मरीज़ों का इलाज भी उपलब्ध है।

डॉक्टर से कब मिलें

अगर आपकी उम्र 50 से ऊपर है, मेनोपॉज़ हो चुका है, परिवार में हड्डियों की कमज़ोरी का इतिहास है, पीठ या कमर में बार-बार दर्द रहता है, कद घट रहा है, या मामूली चोट में भी हड्डी टूट गई है, तो देर न करें और डॉ. नवनीत निश्चल से सलाह लें। समय पर जांच और इलाज से गंभीर फ्रैक्चर से काफी हद तक बचा जा सकता है।

अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल क्यों चुनें

  • डॉ. नवनीत निश्चल, ऑर्थोपेडिक सर्जन (MBBS, DNB Ortho, MCh) की देखरेख में इलाज
  • ब्लड टेस्ट, एक्स-रे जैसी जांच एक ही जगह उपलब्ध
  • दवाई और फिजियोथेरेपी से लेकर फ्रैक्चर सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट तक हर स्टेज का इलाज
  • ऑर्थो ट्रॉमा के लिए 24×7 इमरजेंसी सुविधा
  • कैशलेस इंश्योरेंस, TPA कोऑर्डिनेशन और आयुष्मान भारत सपोर्ट
  • गया और मगध क्षेत्र में ही विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक देखभाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *