घंटों मोबाइल में सिर झुकाकर स्क्रॉल करना, लैपटॉप पर झुककर काम करना और दिन भर एक ही पोज़िशन में बैठे रहना, आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। इसका सीधा असर गर्दन की हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है। पहले सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस को 50 के बाद की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25 से 35 साल के युवाओं में भी गर्दन के दर्द की शिकायतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। इस ब्लॉग में जानेंगे कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस क्या है, इसके कारण और लक्षण क्या हैं, और इसका इलाज व बचाव कैसे किया जाए।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस क्या है
हमारी गर्दन में सात छोटी हड्डियां (वर्टिब्रा) होती हैं, जिनके बीच में मुलायम गद्दी जैसी डिस्क होती है। यह डिस्क गर्दन की गति को आसान बनाती है और झटकों को सहती है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में इन डिस्क और हड्डियों में घिसावट आने लगती है। डिस्क सूख कर पतली हो जाती है, हड्डियों के किनारों पर छोटे उभार (बोन स्पर) बनने लगते हैं, और कई बार ये नसों पर दबाव डालने लगते हैं। इसी वजह से दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कंधे, बांह और हाथ तक पहुंच सकता है।
मोबाइल और लैपटॉप से गर्दन पर क्या असर पड़ता है
सीधी गर्दन के साथ सिर का वज़न लगभग 4 से 5 किलो होता है। जब हम मोबाइल देखने के लिए गर्दन आगे झुकाते हैं, तो यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है। रोज़ घंटों इस पोज़िशन में रहने पर:
- गर्दन के पीछे की मांसपेशियां लगातार खिंची रहती हैं और थक जाती हैं
- डिस्क पर बार-बार दबाव पड़ने से घिसावट जल्दी शुरू हो जाती है
- कंधे आगे की ओर झुकने लगते हैं और पीठ का पोस्चर बिगड़ता है
- गर्दन की प्राकृतिक curve धीरे-धीरे सीधी होने लगती है
इसे आजकल “टेक्स्ट नेक” भी कहा जाता है।
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के कारण
- लंबे समय तक गलत पोस्चर — मोबाइल, लैपटॉप या डेस्क पर झुककर बैठना
- बढ़ती उम्र — उम्र के साथ डिस्क का स्वाभाविक रूप से सूखना और घिसना
- गर्दन की पुरानी चोट — एक्सीडेंट, गिरने या झटके लगने से हुई चोट
- शारीरिक गतिविधि की कमी — मांसपेशियों का कमज़ोर होना
- भारी वज़न उठाना या सिर पर वज़न ढोने की आदत
- गलत तकिये का इस्तेमाल — बहुत ऊंचा या बहुत सख्त तकिया
- पारिवारिक इतिहास — परिवार में स्पाइन की समस्या रही हो
- धूम्रपान और तनाव, जो मांसपेशियों की जकड़न बढ़ाते हैं
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के लक्षण
- गर्दन में लगातार दर्द और जकड़न, खासकर सुबह उठने पर
- गर्दन घुमाने या ऊपर-नीचे करने में दिक्कत
- गर्दन से कंधे और बांह तक फैलता दर्द
- हाथ या उंगलियों में सुन्नपन और झनझनाहट
- हाथों की पकड़ कमज़ोर होना, चीज़ें हाथ से छूट जाना
- सिर के पिछले हिस्से में दर्द या भारीपन, जो सिरदर्द जैसा लगे
- चक्कर आना या गर्दन घुमाने पर संतुलन बिगड़ना
- गर्दन से कट-कट की आवाज़ आना
अगर हाथ-पैरों में कमज़ोरी, चलने में लड़खड़ाहट, या पेशाब-शौच पर नियंत्रण में दिक्कत महसूस हो, तो यह गंभीर संकेत है। ऐसे में बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से मिलें।
जांच में क्या किया जाता है
अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में डॉ. नवनीत निश्चल पहले क्लिनिकल जांच करते हैं, जिसमें गर्दन की गति, मांसपेशियों की ताकत और हाथों की संवेदना देखी जाती है। ज़रूरत के अनुसार ये टेस्ट कराए जाते हैं:
- एक्स-रे — गर्दन की हड्डियों की बनावट, डिस्क स्पेस और बोन स्पर देखने के लिए
- एमआरआई — डिस्क, नसों और स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव की विस्तृत जानकारी के लिए
- नर्व कंडक्शन स्टडी — कुछ मामलों में, नसों की कार्यक्षमता जांचने के लिए
इलाज के विकल्प
ज़्यादातर मरीज़ों में सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस का इलाज बिना सर्जरी के हो जाता है।
- दवाइयां — दर्द और सूजन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दर्द निवारक और मांसपेशियों को आराम देने वाली दवाइयां
- फिजियोथेरेपी — गर्दन की स्ट्रेचिंग और मज़बूती की एक्सरसाइज़, जो इलाज की सबसे अहम कड़ी है
- गर्म या ठंडी सिकाई — दर्द और जकड़न में आराम के लिए
- सर्वाइकल कॉलर — कुछ समय के लिए गर्दन को सहारा देने के लिए, डॉक्टर की सलाह पर ही
- पोस्चर में सुधार — काम करने और बैठने के तरीके में बदलाव
- इंजेक्शन थेरेपी — जब दर्द ज़्यादा हो और नस पर सूजन हो, तब नस के आसपास इंजेक्शन से राहत
- सर्जरी — जब नसों या स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव गंभीर हो, हाथों में कमज़ोरी बढ़ रही हो, और बाकी इलाज असर न करें, तब सर्जरी पर विचार किया जाता है
डॉ. नवनीत निश्चल हर मरीज़ की स्थिति देखकर इलाज तय करते हैं, और सर्जरी की सलाह तभी दी जाती है जब बाकी सभी उपाय असर न करें।
मोबाइल और लैपटॉप के दौर में गर्दन को कैसे बचाएं
- मोबाइल को आंखों के स्तर तक उठाकर देखें, गर्दन झुकाने की बजाय
- लैपटॉप को स्टैंड पर रखें, ताकि स्क्रीन आंखों की सीध में रहे
- हर 30 से 40 मिनट में उठकर गर्दन और कंधों को हल्का स्ट्रेच करें
- कुर्सी पर पीठ सीधी रखकर बैठें और कंधे ढीले रखें
- बहुत ऊंचे तकिये से बचें, गर्दन को सहारा देने वाला पतला तकिया इस्तेमाल करें
- लेटकर मोबाइल देखने या बिस्तर पर लैपटॉप चलाने की आदत छोड़ें
- डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की बताई गर्दन की एक्सरसाइज़ रोज़ करें
- नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि करें, जैसे टहलना और स्ट्रेचिंग
इंश्योरेंस, TPA और आयुष्मान भारत सपोर्ट
अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के खर्च की चिंता कम करने के लिए अलग इंश्योरेंस डेस्क उपलब्ध है। ज़्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए कैशलेस इलाज, TPA से सीधा तालमेल ताकि क्लेम अटके नहीं, और आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत पात्र मरीज़ों का इलाज भी उपलब्ध है।
डॉक्टर से कब मिलें
अगर गर्दन का दर्द 2 से 3 हफ्ते से ज़्यादा बना हुआ है, दर्द कंधे या बांह तक फैल रहा है, हाथों में सुन्नपन या कमज़ोरी महसूस हो रही है, या रोज़मर्रा के काम दर्द की वजह से प्रभावित हो रहे हैं, तो देर न करें और डॉ. नवनीत निश्चल से सलाह लें। शुरुआती स्टेज में इलाज शुरू करने से ज़्यादातर मामलों में सर्जरी की नौबत नहीं आती।
अर्श सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल क्यों चुनें
- डॉ. नवनीत निश्चल, ऑर्थोपेडिक सर्जन (MBBS, DNB Ortho, MCh) की देखरेख में इलाज
- एक्स-रे और एमआरआई जैसी जांच एक ही जगह उपलब्ध
- फिजियोथेरेपी से लेकर सर्जरी तक, हर स्टेज का इलाज
- कैशलेस इंश्योरेंस, TPA कोऑर्डिनेशन और आयुष्मान भारत सपोर्ट
- गया और मगध क्षेत्र में ही विशेषज्ञ स्पाइन और ऑर्थोपेडिक देखभा

APPOINTMENT
DOCTORS
ABOUT US
CONTACT US